डेली टीवी, चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पास्टर अंकुर नरूला और उनकी संस्था के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने याचिका में लगाए गए गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों से विस्तृत प्रतिक्रिया मांगी है।

जालंधर निवासी तेजस्वी मिन्हास द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि अंकुर नरूला और उनकी पत्नी सोनिया नरूला कथित रूप से चमत्कारी उपचार और “अभिषेक तेल” के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर बीमारियों को धार्मिक तरीकों से ठीक करने के दावे किए जाते हैं, जिसे Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954 का उल्लंघन बताया गया है।
याचिका में यह भी आरोप है कि संस्था को बिना वैध Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) पंजीकरण के विदेशी चंदा मिला है। साथ ही धार्मिक वस्तुओं की बिक्री बिना जीएसटी बिल के किए जाने और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका भी जताई गई है।
जालंधर के खांबरा गांव में बने चर्च भवन के निर्माण को भी कानूनी तौर पर चुनौती दी गई है।याचिकाकर्ता का दावा है कि कथित चमत्कारों के जरिये कमजोर वर्गों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित किया जा रहा है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में सरकारों की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।










