डेली टीवी वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर अगले पांच दिन सकारात्मक रहे तो के साथ चल रहा संकट समाप्त हो सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ईरान में “और हत्याएं” नहीं चाहते, लेकिन यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।

क्या सच में हो रही है बातचीत?ट्रंप का दावा है कि ईरान ने स्वयं बातचीत की पहल की है और एक “सम्मानित” ईरानी नेता से उनकी बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि आज फिर फोन पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि, ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोई आधिकारिक वार्ता नहीं चल रही है। दोनों पक्षों के दावों में यह विरोधाभास स्थिति को और जटिल बना रहा है।
ट्रंप के प्रमुख दावे
ईरान के साथ कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है।लगभग 15 बिंदुओं पर समझौते की रूपरेखा तैयार।अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे।
समझौता हुआ तो “बहुत खुश” होगा।बातचीत नाकाम रही तो बमबारी जारी रहेगी।नेतृत्व परिवर्तन (रेजीम चेंज) की संभावना पर भी विचार।ईरान के तेल पर कुछ प्रतिबंधों में ढील, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनी रहे।
ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि B-2 बमवर्षकों से हमला नहीं किया गया होता, तो ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता था।
बातचीत या टकराव?
ट्रंप ने माना कि किसी समझौते की गारंटी नहीं दी जा सकती। उनका कहना है कि या तो डील होगी या सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। यानी कूटनीति और दबाव—दोनों रणनीतियां साथ-साथ चल रही हैं।
रेजीम चेंज पर संकेत
ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह उन्हें मारना नहीं चाहते, लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा हालात में नेतृत्व किस स्थिति में है। उन्होंने सत्ता परिवर्तन की संभावना पर भी चर्चा होने का संकेत दिया।
फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील हैं। एक ओर बातचीत के दावे हैं, तो दूसरी ओर बमबारी की चेतावनी। आने वाले पांच दिन इस पूरे पश्चिम एशिया संकट के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।










