डेली टीवी, वॉशिंगटन/तेहरान। 107 दिनों के तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। ईरान ने संकेत दिए हैं कि प्रतिबंधों में राहत, नाकाबंदी खत्म होने और संपत्तियों की रिहाई के बाद अंतिम समझौते पर आगे बढ़ा जा सकता है।

वहीं ट्रंप की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी नरमी देखने को मिली है।
तेल बाजार को राहत, दुनिया की नजरें समझौते परब्रेंट क्रूड और WTI की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है।
दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति को नई राहत मिल सकती है।
भारत के लिए क्या हैं मायने?होर्मुज के खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि जहाजों पर सेवा शुल्क की व्यवस्था भारत के आयात खर्च को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यह समझौता भारत के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आ सकता है।
कौन झुका, कौन जीता?समझौते की शर्तों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं, लेकिन इतना तय है कि यह डील मध्य-पूर्व की राजनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार की दिशा बदल सकती है।










