डेली टीवी, जालंधर। नशे के कहर ने एक बार फिर पूरे परिवार को उजाड़ दिया। मां की आंखों का तारा और पत्नी का सुहाग नशे की भेंट चढ़ गया। सात माह की गर्भवती पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, जिसने सपनों भरा भविष्य संजोया था, लेकिन किस्मत ने उसे गहरे अंधेरे में धकेल दिया।

जिस घर में लोहड़ी की खुशियां मनाई जानी थीं, उसी आंगन में चिता की आग जल उठी।परिवार पर दुखों का पहाड़ उस समय टूट पड़ा जब युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
घर में मातम पसरा है, मां बेसुध है और गर्भवती पत्नी बार-बार एक ही सवाल कर रही है—अब उसके बच्चे का सहारा कौन बनेगा? नशे ने न सिर्फ एक जिंदगी छीनी, बल्कि एक अजन्मे बच्चे का भविष्य भी अधर में लटका दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में नशा खुलेआम बिक रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सब कुछ खामोश है। सवाल यह है कि आखिर कब तक पंजाब का युवा नशे की बलि चढ़ता रहेगा और कब तक घरों के चिराग बुझते रहेंगे?
पूर्व विधायक और भाजपा नेता शीतल अंगुराल ने कहा कि नशा परिवार के लिए नासूर बन गया है, हंसता-खेलता आसियाना त्यौहार के दिन उजड़ गया। सरकार नशा खत्म करने में नाकाम रही है और समाज युवा पीढ़ी को खो रहा है।










