डेली टीवी, न ई दिल्ली/मुंबई/यूएई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और इस्राइल के बीच जारी टकराव ने वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर डाला है। निवेशकों में घबराहट के चलते भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई।

प्री-ट्रेडिंग सत्र में सेंसेक्स करीब 3234.47 अंक गिरकर 78,052.72 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 519 अंक टूटकर 24,659.25 पर पहुंच गया। नियमित कारोबार की शुरुआत के बाद भी दबाव बना रहा और सेंसेक्स 1072 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा।
निफ्टी 24,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, मुद्रा बाजार भी दबाव में रहा। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे कमजोर होकर 91.32 पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ेगा।
यूएई में फंसे पंजाबी परिवार, फ्लाइट्स रद्द होने से बढ़ी मुश्किलें
इस भू-राजनीतिक संकट का असर आम नागरिकों पर भी पड़ा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कई पंजाबी परिवार फ्लाइट्स रद्द होने के कारण फंस गए हैं। इनमें ज्यादातर पर्यटक हैं, जो अलग-अलग देशों की यात्रा पर गए थे और अब अपने वतन लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
एक पीड़ित परिवार ने बताया कि शारजाह से अमृतसर की फ्लाइट रद्द होने के बाद एयरपोर्ट पर 60 से 70 पंजाबी परिवार फंसे रहे। दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन लाइनें व्यस्त मिलीं।
मजबूरी में कुछ परिवारों को होटल में रात बितानी पड़ी।पंजाब के एनआरआई मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने पीड़ितों से फोन पर बातचीत कर हालात की जानकारी ली और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
वहीं बठिंडा का एक दंपती दुबई एयरपोर्ट बंद होने के कारण फंसा हुआ है। उनका कहना है कि उनके पास पैसे खत्म हो चुके हैं और जरूरी दवाइयों की भी भारी कमी है।
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने भी पीड़ितों का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सरकार से राहत की उम्मीद
फंसे हुए परिवारों ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से जल्द सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है। मौजूदा हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी गहराई से पड़ता है।










