जेडीयू के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और एम एल सी को जनता ने खदेड़ा, बदल जाएंगे बिहार में राजनीतिक समीकरण!
डेली टीवी, पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने 5 मार्च को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है और 16 मार्च को उनके राज्यसभा सांसद चुने जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। उनके इस कदम के बाद राज्य में नई सरकार बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अब बिहार में पहली बार Bharatiya Janata Party अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।


नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आते ही Janata Dal (United) के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली। गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास और पार्टी कार्यालय के बाहर समर्थकों ने प्रदर्शन किया। कई कार्यकर्ता भावुक होकर रोते नजर आए और उन्होंने नीतीश कुमार से बिहार छोड़कर दिल्ली न जाने की अपील की। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने कुछ नेताओं के खिलाफ नारेबाजी भी की और पार्टी दफ्तर में तोड़फोड़ की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर कुर्मी-कोइरी और EBC वर्ग के कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर किया। यदि यह नाराजगी संगठन के निचले स्तर तक फैलती है तो पार्टी में टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

दरअसल, पिछले दो दशकों से JDU पूरी तरह नीतीश कुमार की छवि पर टिकी रही है। बिहार की राजनीति में तीसरे मोर्चे की धुरी भी वही रहे हैं और करीब 16% से ज्यादा स्थायी वोट बैंक उनके साथ माना जाता है। ऐसे में उनके दिल्ली जाने की खबर से कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच निराशा का माहौल बन गया है।
इसी बीच यह भी चर्चा तेज है कि पार्टी में संभावित बगावत को रोकने के लिए नीतीश कुमार के बेटे Nishant Kumar को राजनीति में उतारा जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा भी चाहती है कि JDU मजबूत बनी रहे, क्योंकि पार्टी के बिखरने की स्थिति में उसका वोट बैंक किसी और राजनीतिक विकल्प, खासकर Prashant Kishor की ओर जा सकता है। ऐसे में निशांत कुमार को नई सरकार में डिप्टी सीएम बनाए जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा चल रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या निशांत कुमार की एंट्री JDU को एकजुट रख पाएगी या फिर नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद बिहार की राजनीति में नया समीकरण बनेगा।










