डेली टीवी वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। अमेरिकी संघीय अदालत ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) के अतिरिक्त शुल्क को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है।

न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने कहा कि संघीय सरकार के पास इतनी बड़ी फीस लगाने का स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं था। इस फैसले से हजारों भारतीय इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और तकनीकी विशेषज्ञों को राहत मिलेगी, जो H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शुल्क लागू रहता तो विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती महंगी हो जाती और अमेरिकी कंपनियों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता।
बोस्टन की संघीय अदालत में 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर मुकदमे के बाद यह फैसला आया है। अदालत के इस निर्णय को भारतीय पेशेवरों और वैश्विक प्रतिभाओं के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है।










