डेली टीवी, जालंधर। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना होती है और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है

।Maa Durga Ke 9 Roop: मां दुर्गा के 9 स्वरूप
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जो शक्ति, स्थिरता और आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक मानी जाती हैं।दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है, जो तप, त्याग और सच्चे समर्पण का प्रतीक हैं।तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो साहस, शांति और बुराई के विनाश की शक्ति देती हैं।चौथे दिन मां कूष्मांडा की उपासना होती है, जिन्हें सृष्टि की रचयिता और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो मातृत्व, संरक्षण और समृद्धि का प्रतीक हैं।छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना होती है, जो शक्ति, आत्मज्ञान और साहस प्रदान करती हैं।सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो नकारात्मक शक्तियों के नाश और सुरक्षा का प्रतीक हैं।आठवें दिन मां महागौरी की आराधना होती है, जो पवित्रता, करुणा और मनोकामनाओं की पूर्ति से जुड़ी हैं।नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो सिद्धि, सफलता और आध्यात्मिक पूर्णता प्रदान करती हैं।
Chaitra Navratri 2026 Colors: नवरात्रि में किस दिन पहनें कौन सा रंग?
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में पीला रंग शुभ माना जाता है।दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के लिए हरा रंग धारण करना अच्छा रहता है।तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में ग्रे (स्लेटी) रंग पहनना उचित है।चौथे दिन मां कूष्मांडा के लिए नारंगी रंग शुभ माना जाता है।पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा में सफेद रंग धारण करना चाहिए।छठे दिन मां कात्यायनी के लिए लाल रंग पहनना लाभकारी होता है।सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा में नीला रंग शुभ माना जाता है।आठवें दिन मां महागौरी के लिए गुलाबी रंग पहनना अच्छा रहता है।नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा में बैंगनी रंग धारण करना शुभ होता है।
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में घट स्थापना विधि
नवरात्रि पूजन के लिए सबसे पहले घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक स्वस्तिक बना लें।एक साफ माता की चौकी रखें और उसपर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।अब देवी की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।देवी को लाल चुनरी पहनाएं और फूलों की माला अर्पित करें।अब आप मां दुर्गा का पूरा श्रृंगार करें और अंत में इत्र अवश्य लगाएं।इसके बाद कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी का पात्र लेकर उसमें साफ मिट्टी भर दें।इसमें कुछ जौ के बीज डालें और साफ पानी में गंगाजल मिलाकर इस पर थोड़ा छिड़काव करें।फिर तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का, चावल और कुछ बताशे डाल दें।अब लोटे पर कलावा बांधें और उस पर टिका लगाएं।7 अशोक के पत्ते लेकर उन्हें लोटे में डालें।अब एक पानी वाला नारियल लेकर उसे चुनरी पहनाएं और उसे कलावे से बांध दें।चुनरी वाले नारियल को लोटे के ऊपर रखें और उसे रोली से तिलक लगाएं।इस कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित कर लें।अब शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और धूप उठा लें।धूप पर लौंग का जोड़ा रखें और कपूर जलाएं।देवी को फल, मिठाई और सूखे मेवे भोग के रूप में अर्पित करें।दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लें और अंत में आरती करें।
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कैलेंडर 2026
19 मार्च 2026- अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना20 मार्च 2026- मां ब्रह्मचारिणी पूजा21 मार्च 2026- मां चंद्रघंटा पूजा22 मार्च 2026- मां कुष्मांडा पूजा23 मार्च 2026- मां स्कंदमाता पूजा24 मार्च 2026- मां कात्यायनी पूजा25 मार्च 2026- मां कालरात्रि पूजा26 मार्च 2026- मां महागौरी पूजा27 मार्च 2026- मां सिद्धिदात्री पूजा
माता के नौ स्वरूप
माता के नौ स्वरूपों के बारे में पुराणों में लिखा है।प्रथम शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघण्टेती कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी,दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!मां दुर्गा के 9 अवतार आपको9 गुणों – शक्ति, खुशी, मानवता, शांति, ज्ञान, भक्ति,नाम, प्रसिद्धि और स्वास्थ्य के साथ आशीर्वाद दें।चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!










